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  •  Saraswati Shishu Mandir

सरस्वती शिशु मन्दिर में आपका स्वागत है

सरस्वती शिशु मन्दिर रूद्रपुर का प्रारम्भ श्री मनोहर लाल जी तथा स्व0 श्री सतीश चन्द्र रस्तोगी के प्रयास से सन् 1957 में आर0आर0 क्वार्टर में नर्सरी से प्रारम्भ किया गया।
सन् 1961 में विद्यालय का पंजीकरण कराया गया तथा सन् 1964-65 में विद्यालय को कक्षा पंचम तक की मान्यता प्राप्त हुई। यह विद्यालय विद्याभारती द्वारा संचालित देश के प्रथम पाँच विद्यालयों में से तीसरा विद्यालय है।
सन् 1957 से अब तक वर्तमान प्रबन्ध समिति एवं कुशल आचार्यो के पूर्ण सहयोग से शिक्षा के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
वर्तमान में समिति द्वारा दो विद्यालय संचालित है। प्राथमिक स्तर पर सरस्वती शिशु मन्दिर कक्षा-प्रथम से पंचम तथा सरस्वती शिशु मन्दिर इण्टर कालेज कक्षा-षष्ठ से द्वादश तक।

विद्या भारती
अखिल भारती शिक्षण संस्थान
सरस्वती शिशु मन्दिर रूद्रपुर का प्रारम्भ श्री मनोहर लाल जी तथा स्व0 श्री सतीश चन्द्र रस्तोगी के प्रयास से सन् 1957 में आर0आर0 क्वार्टर में नर्सरी से प्रारम्भ किया गया।
सन् 1961 में विद्यालय का पंजीकरण कराया गया तथा सन् 1964-65 में विद्यालय को कक्षा पंचम तक की मान्यता प्राप्त हुई। यह विद्यालय विद्याभारती द्वारा संचालित देश के प्रथम पाँच विद्यालयों में से तीसरा विद्यालय है।
सन् 1957 से अब तक वर्तमान प्रबन्ध समिति एवं कुशल आचार्यो के पूर्ण सहयोग से शिक्षा के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
वर्तमान में समिति द्वारा दो विद्यालय संचालित है। प्राथमिक स्तर पर सरस्वती शिशु मन्दिर कक्षा-प्रथम से पंचम तथा सरस्वती शिशु मन्दिर इण्टर कालेज कक्षा-षष्ठ से द्वादश तक।

सरस्वती शिशु मन्दिर एक देशव्यापी संगठन ’’विद्या भारती’’ के अंतर्गत संचालित है। सन् 1952 में श्री कृष्ण चन्द्र गाँधी द्वारा प्रथम सरस्वती शिशु मन्दिर गोरखपुर में स्थापित किया गया। भैय्या/बहिनों में शिक्षा के साथ ही संस्कार, राष्ट्रभक्ति, स्वाबलम्बन आदि गुण निर्माण करने के लिए शिक्षकों को आचार्य का नाम दिया। हमारे शिक्षा विदों का मानना था कि संस्कार विहीन शिक्षा इस राष्ट्र को शक्तिशाली नहीं बना सकती। इस उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रेरण से विद्या भारती का गठन किया गया जिसके माध्यम से आज देशभर में सरस्वती शिशु मन्दिर चलाए जा रहे हैं।
विद्या भारती के अंतर्गत शिशु शिक्षा समिति के द्वारा प्रथम से लेकर पंचम तक के नगरीय क्षेत्र के सरस्वती शिशु मन्दिर चलाए जाते है तथा ग्रामीण क्षेत्र में कक्षा प्रथम से पंचम तक के विद्यालय जन शिक्षा समिति के अंतर्गत चलाए जाते हैं।
कक्षा-षष्ठ से द्वादश तक के विद्यालय भारतीय शिक्षा समिति के अन्तर्गत चलाये जाते हैं।